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Blog posts : "Poetry"

देश

2017-04

POETRY

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बूँद

2017-04

POETRY

गाँव को गाँव रहने दें।

2017-03

POETRY

इस शहरीकरण की बीमारी ने सबको मारा है। 

अब आपसे बस इतना सा सरोकार हमारा है। 

इसको रोको, और मत बदलो, इसको ऐसा ही रहने दो। …

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आप बीती

2017-03

जो मैंने देखा

2017-03

 

यह वो आइना हैं, जो दिखलाता हैं सब जो मैंने यहाँ देखा 
ये वो हाल-ए-दिल बताता हैं, जो मैंने यहाँ देखा. 
 
साथ मेरे दुनिया का एक अक्स…

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गाँव को गाँव रहने दो

2017-01

इस शहरीकरण की बीमारी ने सबको मारा है।

अब आपसे बस इतना सा सरोकार हमारा है।

इसको रोको, और मत बदलो, इसको ऐसा ही रहने दो।…

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बात अधुरी..

2017-01

रह गई जो बात अधुरी, लबो के दायरे तक आकर भी।
आँखों ने लो वो कह ही डाली।।
लिख ना पाया मोहब्बत के चार लफ्ज खत मे तो क्या,
क…

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वोटबंदी-नोटबंदी

2016-12

किसी को कहीं वोटबंदी ने मारा,
किसी कहीं नोटबंदी ने मारा।
मरा पर मगर आदमी आम ही,
कुचक्रों में फँसकर के घूमा बेचारा ।…

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Mushkil

2016-12

लेफ्ट राईट सेण्टर: ये नेताओं के भक्त आखिर क्या चाहते हैं?

2016-12

भाजपा: भक्तो की पार्टी। 

ये भक्त जो म्हारी गली हांडते है,

मन्ने गलियाते है, लताड़ते है।

दूर नहीं जाते, बस कोसते जाते है।…

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बूढ़ी माँ

2016-12

सपने

2016-12

गांधी बाबा, मोदी बाबू आए थे रात सपने में।
सुनी थी बातें मैंने उनकी, करते थे जो सपने में॥
गाँधी बोले साठ साल से, एक गाल बल बैठा था। …

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बचपना

2016-12

बारिशो

2016-12

बारिशो की निकी निकी बूंदों वाला दिल
चाहे जो सनम, वो है बड़ा संगदिल। 

जाती बहारो में रुसवा मेरा दिल 
सूखे पेड़ो की गुमसुम, छाओ में बैठा दिल॥ …

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एक नेता के मन की आवाज़: पहचान कौन?

2016-11

खुल्ले पैसे का अकाल पड़ रहा है,

जैसे चुनाव खतरे में पड़ रहा है।

वैसे ही भाई भतीजावाद में पार्टी का हाल बुरा है,

गोदाम में पड़े…

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बेमकसद

2016-11

हिदायत

2016-09

 

दी हिदायत मुझे उन्होंने किसी और सा बनने की

और इसी कोशिश में उन्होंने अपनी औलाद मार दी। 

कोशिश करने की सीमा उन्होंने जो तय कर डाली …

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जो तमाशा उसने किया, वो तुम भी कर के दिखाओ।

2016-09

अब माँ के प्रेम की यही परिभाषा है,
दिखावटी है दुनिया, और दिखावटी ये तमाशा है.
साल में एक बार जो वक़्त निकाल के मिलने जाये,…

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उधेड़बुन

2016-09

केजरीवाल चालीसा॥

2016-09

 

केजरीवाल चालीसा॥ 
 
 

काल से अनंतकाल तक, नभ से भूताल तक 

सन्नाटे से भूचाल तक, हर उठे सवाल तक 
ये खाली बजता थाल है,
हां…

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