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वेलो की घूमती बातें|

कुछ तो लोग लिखेंगे|

मामूली नहीं, तू भी है तो कसाब|

2017-08

गाय हमारी माता है| 
लालू ने खाया चारा है| 
गोरक्षको ने मचाया कोहराम है| 
बचाने वालो के मुँह में बस राम है|

खून खराबा सब आम है| 
राजनीती जातिवाद की गुलाम है| 
हैसियत सबको अपनी मालूम है| 
ज़िन्दगी की कीमत मासूम है|

मासूमो की लाशें नाज़ुक बड़ी थी| 
दुनिया से उनको उमीदें भी कम ही थी| 
उम्मीदो पे उनकी खरे हम है जो उतरे

जन्नत का रस्ता दिखा जो सके|

किसकी थी गलती, था कौन गलत?
दहशत में है अब, इंसानियत

खामोश है अगर, तो है तू गज़ब|
अपने को इंसान कहियो ना अब| 
 

आँखों के आंसू भी सूखे तेरे| 
ज़ुल्म हो अगर तो अँधेरा दिखे| 
ख़ामोशी को अगर तू समझता जवाब| 
मामूली नहीं, तू भी है तो कसाब| 


मामूली नहीं, तू भी है तो कसाब| 

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