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फिर भी वो नए ज़माने के भगवान् है

2017-10

तमाशा ये जो आम है 
कहाँ है जो राम है?
हिन्द में कोहराम है| 
भक्ति के नाम पर गुंडागर्दी आम है|

संजीदा ये घमसान है| 
ज़िंदा लोगो का शमशान है| 
जो आम है वो परेशान है| 
जाने क्या कोहराम है?

घर अब पिंजरा हो चला है| 
पूरा शहर सदमे में पड़ा है
दूर से सुना आने वाला कोई ख़ास है 
सामाजिक दुष्कर्मो का उसपर इलज़ाम है| 
उसके भक्तो का वो भगवान है| 
कैदखाने में पहुंचने के निशाँ है| 
फिर भी वो नए ज़माने के भगवान् है|

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