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वेलो की घूमती बातें|

कुछ तो लोग लिखेंगे|

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जगत

2017-04

चाह इस लौकिक जगत से,
सम्मान मानव को मिले।
सम्मान हो कण-रश्मि का,
उत्थान मानव को मिले।
नित निरंतर हाँथ सब,
छूने बढ़ें उस शीर्ष को।
जाकर जहाँ इस मुल्क को,
शीर्षस्थ का सम्मान हो।

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