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वेलो की घूमती बातें|

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वोटबंदी-नोटबंदी

2016-12

किसी को कहीं वोटबंदी ने मारा,
किसी कहीं नोटबंदी ने मारा।
मरा पर मगर आदमी आम ही,
कुचक्रों में फँसकर के घूमा बेचारा ।
धन-बल की दौलत जहाँ थी बरसती,
लगी चोट गहरी नोटबंदी से उनको ।
नोटों से वोटों की आशा थी जिनको,
वोटों का डर अबा सताता है उनको।
कहते कहाते फिकर देश की है ,
फिकर कुर्सियों की सताती है उनको।
नोटों और वोटों की खिलाती सियासत,
आम जनता की यादें डरातीं हैं उनको।

 

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