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अयोध्या में मंदिर बना के क्या उखाड़ लोगे स्वामी

2017-04

POETRY 

 

अयोध्या में मंदिर बना के क्या उखाड़ लोगे स्वामी।

हिंदुस्तान में कम मिलते हो, अयोध्या में कितना वक़्त गुज़ार लोगे स्वामी॥

 

वैलेंटाइन पर अपनी भूतपूर्व बीवी को एक गुलाब भेज लेना

रोज़ के भाषणों से होता सर दर्द है, थोड़ा बक्श देना।

 

ये दो महीने का चुनाव, हम जानते है, तुम्हारी किटी पार्टी हो लिया है।

जिसके बारे में जो चुगली करवालो, तुम्हारा मन क्या अभी भी नहीं भरा है॥

 

मार्ग दर्शक मंडल से अपने क्या कभी कोई मार्ग दर्शन लिया है?

मैं सम्मान करता हूँ, कह कह के कितना बेइज़्ज़त किया है।

 

उन्ही की बनायीं पार्टी में बैठकर, उन्ही को ठेंगा दिखा डाला॥

तुमने युगपुरुष, ये कमाल मंज़र दिखा डाला।

 

जनता का पपलू बना डाला, हाय मेरे “मित्रों” तुमने ये क्या कर डाला

कानाफूसी खेलने वाले को देश थमा डाला॥

 

गरीबो की भलाई करने का जो कथित तौर पर बीड़ा उठा कर बैठे है ।

मुद्राओ की स्तम्भ बंद कर के उन्ही की नौकरी छीन बैठे है॥

 

नौकरी दिलाने के वादे को ठेंगा दिखा कर बैठे है।

जिनके पास थी उनकी भी चीन बैठे है।

 

जो लोग मरे इस पीड़ा में, उनका किसी भाषण में ज़िक्र  तो करो।

लालू से जो हारे हो बिहार में, अब तुम लालू वाले काम तो मत करो॥

 

अयोध्या में मंदिर बना के क्या उखाड़ लोगे स्वामी।

हिंदुस्तान में कम मिलते हो, अयोध्या में कितना वक़्त गुज़ार लोगे स्वामी॥

 

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