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जो दिल्ली में अपना बना आशियाँ

2017-07

जो दिल्ली में अपना बना आशियाँ,
न जमीं ही मिली न मिला आसमां।
क्या शिकवा करुं बेरहम इस जगह से,
न पाया था दो गज जो सदर-ए-जहाँ।
अवधेश

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