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वेलो की घूमती बातें|

कुछ तो लोग लिखेंगे|

दवा का असर

2017-04

कुछ पक्तियाँ यथार्थ स्थिति से व्यथित मन के उद्गार स्वरूप लिखा था।
इतनी कटुता और व्यक्तिगत प्रहार इस चुनाव प्रचार में हो रहा है, मुझे डर है कितना मनभेद बन जायेगा और देश का क्या होगा?

 

सोचा मैंने दवा का असर हो रहा है,
पर हकीकत में इसपर कहर हो रहा है।
रहम कुछ करो अब वतन के हकीमों,
घाव छोटा भी इसपर जखम हो रहा है।

 

 

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