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VelaWrites

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Blog posts : "Poetry"

आये तो जाना

2017-07

आये तो जाना मुकाम आ गया,
दुनियादारी में जाना कि ग्यान आ गया।
बहुत देर कर.दी समझ आते- आते,
उससे पहले मेरा इमतिहान आ गया।…

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घूमती सी धरती

2017-07

घूमती सी धरती पर घूमते रहे हैं,
ठहरा हुआ जानकर झूमते रहे हैं।
पुतला पंचतत्व का सांस के सहारे पर,
झूठ के घमंड में ही भूलते रहे हैं।…

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जो दिल्ली में अपना बना आशियाँ

2017-07

जो दिल्ली में अपना बना आशियाँ,
न जमीं ही मिली न मिला आसमां।
क्या शिकवा करुं बेरहम इस जगह से,
न पाया था दो गज जो सदर-ए-जहाँ।…

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छोड़ रास्ते इंसानियत के

2017-07

छोड़ रास्ते इंसानियत के जो हैवानियत पूजते हैंं,
कुरेदकर पुराने जख्म जिगर का हाल पूछते हैं।
मार जो देते हैंं इन्सान को किसी भी इल्जाम पर,…

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ध्यान हो इतिहास का

2017-07

ध्यान हो इतिहास का याद रख भूगोल को,
बर्बाद होते हैं किले जब न मानव मोल हो।
अवधेश

अनजान अच्छा..

2017-07

अनजान अच्छा जमाने की फितरत से,
इंसाँ हो, इन्साँ सी नीयत बची हो।
कि दुनिया तुम्हें जो सिखायेगी करतब,
न तुम ही रहोगे, न दुनिया बचेगी।…

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प्यार

2017-07

Pyar zindagi me kuch logo ko bahut khas bana deta hain 
unke saath guzre har pal ko ek pyara ehsas bana deta hain
Mumkin hota hain har safar unka haath thame phir to
wo guzre har pal ko jehen me ek meethi yaad bana deta hain

Kehne ko bahut kuch hain par shayad bas ye itna hi karta hain
ye …

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इमोशनल अत्याचार

2017-07

Jis baat se toote uska dil,
wo baat duniya me kaash na ho..
Aur agar ho bhi koi aisi baat 
to god phir EA(Emotional Atyachaar) tuhi jheliyo  

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राष्ट्रपति उम्मीदवार

2017-06

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

POETRY

 

अब तो राष्ट्रपति उम्मीदवार का नाम भी राम हो गया है|

भाजपा को लगता है, राम मंदिर का आधा काम हो गया …

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गरीबी और मजबूरी

2017-06

गरीबी और मजबूरी में पति-पत्नी का वार्तालाप

इमेज सोर्स: पत्रिका न्यूज़| 

करते-करते काम थके, मजदूर हो गये।
टूटा आँखों का सपना, मज…

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दुखद।

2017-06

मंदसौर की घटना दुखद।
किसानों की हालत दुखद।
सालों-साल की अनदेखी दुखद।
शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा दुखद।
गुस्सा और उससे निपटने का तरीका द…

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केजरीवाल का हुतूतूतू

2017-05

Poetry/Satire 

 

इमेज सोर्स: टाइम्स ऑफ़ इंडिया

 

बहुत फायदे थे मिश्रा जी के इल्ज़ामो के,

बहुत दिनों से सब बचे है केजरीवाल के इल्ज़ामो से| …

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आम आदमी और खास आदमी

2017-05

कविता 

खुदा की खुदाई ये नदिया ये सागर, बाकी सब है गलतफहमी।
सिखाती सभी को प्रकृति आदर, आया कहाँ से ये खास आदमी?

साज-ओ-स…

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एक विरासत - पगड़ी

2017-05

एक विरासत - पगड़ी

भारतीय जन मानस में पगड़ी जाने कब, क्यों और कैसे धारक के प्रतिष्ठा का प्रतीक बन जाती है। अपनी इज़्ज़त को वह उससे और उसकी बेइज्जती को अपने आप से जोड़ देता है। निर्जीव कपड़े से बनी अपनी जगह के नाते सिर का प्रतीक बन जाती है। ध्यान आयीं महापुरुषों द्वारा धारण की ज…

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जगत

2017-04

चाह इस लौकिक जगत से,
सम्मान मानव को मिले।
सम्मान हो कण-रश्मि का,
उत्थान मानव को मिले।
नित निरंतर हाँथ सब,
छूने बढ़ें उस शीर्ष को।…

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दवा का असर

2017-04

कुछ पक्तियाँ यथार्थ स्थिति से व्यथित मन के उद्गार स्वरूप लिखा था।
इतनी कटुता और व्यक्तिगत प्रहार इस चुनाव प्रचार में हो रहा है, मुझे डर है कितना मनभेद बन जायेगा और देश का क्या होगा?…

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एक समाज ऐसा हो|

2017-04

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आवाज़

2017-04

POETRY 

कुछ तन्हाई के पलो में लिखी चंद जज़्बात  पुराने दोस्तों को याद करते हुए| 

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जलियांवाला बाग़

2017-04

POETRY

 

 

अयोध्या में मंदिर बना के क्या उखाड़ लोगे स्वामी

2017-04

POETRY 

 

अयोध्या में मंदिर बना के क्या उखाड़ लोगे स्वामी।

हिंदुस्तान में कम मिलते हो, अयोध्या में कितना वक़्त गुज़ार लोगे स्वामी॥…

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