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Vela Writes

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1947 के बाद एक बार फिर हमने अंग्रेज़ो को अपने देश से खदेड़ा है।

बंगलुरु: साल 1947 माह अगस्त वो दिन थे जब हमने अंग्रेज़ो को पूरी तरह अपने देश से भगा दिया था। वो गए तो हमे अपना एक  खेल देकर। उसके इलावा कोहिनूर से लेकर जो भी सब लेकर ही गए। वो खेल था क्रिकेट, जिसमे ये अँगरेज़ बहुत आगे थे और हम बस शुरू ही कर  रहे थे। अंग्रेज़ो की पेंठ इस खेल पर विशिस्ट थी। सालो में हमने, कभी वर्ल्ड कप जीतकर कभी ट-२० वर्ल्ड कप जीतकर जीभ चिढ़ाई है।

 


हिंदुस्तान की युवा पीढ़ी को हमेशा ये ऐतराज़ रहा की हमने उन्हें मार मार के क्यों नहीं भगाया। सब भाव विभोर हो उठे जब हमारे क्रिकेटिंग सेनानियों ने बीती रात इंग्लैंड दौरा ख़तम किया। पुरे दौरे में इंग्लैंड की टीम सिर्फ धुनाई खाती रही। आज हमारी आज़ादी की लड़ाई में एक सुनहरा पन्ना और जुड़ गया जब हमने उन्हें उन्ही की शोषित ज़मीन पर नाको चने चबवा दिए। पूरा सोशल मीडिया इंग्लैंड टीम का मज़ाक उदा रहा है। ताक़त में उन्हें भगा ही दिया था अब उन्ही के खेल में उन्हें परास्त कर दिया है। उनके पास २००-३०० साल थे स्पिन खेलना सीखने के लिए पर लगान की तरह वो आज भी ये नहीं कर पाए

धुल चटाकर भेज डाला है। पूरा इंग्लैंड इस वक़्त शर्म से डूबा हुआ है। उन्ही के खेल में उन्हें पूरी तरह परास्त किया है।

 

 

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