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Vela Writes

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यमराज ने किया दिल्ली आने से मना - नर्क की ब्रांच खोली जाएगी दिल्ली में|

यमलोक/देवलोक: नरक में जगह भर जाने के कारण भगवन जी ने नारद जी को नरक के लिए लोकेशन हंटिंग पर भेजा था| यमराज की परेशानी देखते हुए नरक के लिए जगहों की तलाश की जा रही है| पर भगवन तो भगवान ही है उन्हें हर समस्या का समाधान मिल ही जाता है| नारद जी को दिल्ली जाने का सुझाव दिया गया|

 

देखने में स्वर्ग, सहने में नरक| दिल्ली का होने लगा है बेडा गर्ग|

नारद मुनि दिल्ली से लौटे तो नारायण नारायण का जाप नहीं कर रहे थे बल्कि N95 मास्क पहन कर लौटे और साथ ही लेकर लौटे नरक का विकल्प| वो बोले “भगवन दिल्ली की स्तिथि तो नरक से भी बदतर है| वहां धरती के वासी तो उसका कोई ख्याल रखते नहीं| किसान पैसे के आभाव में बची हुई फैसले जला रहे है| छोटे लोग बड़ी गाड़ियों में अकेले जा रहे है| फैक्टरियां का धुआं बस सास के लिए उपलब्ध है| जिन नदियों को माँ बोलते है उन्ही को बांध बना बना कर अपना गुलाम बना रहे है| इससे ज्यादा तो यमराज जी नरक का ख्याल रखते है| हमारे पास जो बहुत ज्यादा बुरे लोग आएंगे उन्हें हम दिल्ली भेज सकते है|”

भगवन एक ही पल मुस्कुराये और चिंतन में डूब गए और बोले इन् लोगो को एक घर दिया था, पृथ्वी नाम इन्होने रख लिया| हर किसी ने वहाँ ज़मीनो को  बाँट कर अपने अपने देश बना लिए| फिर देश के अंदर शहर, गाँव| अब उसी घर को इतना ख़राब कर लिया की इनमे से कोई भी स्वर्ग के सपने तो नहीं देख सकता| ये सभी नरक के ही भागिदार है|यमराज जी ने भी पत्र लिखा है और दिल्ली जाने से साफ़ मना कर दिया है| अब बेहतर है दिल्ली वाले ऊपर आने की बजाय वही भटके|”

खुद का घर बचता नहीं, सुना है मुझे बचाना चाहते है|
अब तो भगवन भी नहीं समझता की आखिर ये इंसान क्या चाहते है ?
हवा ख़राब, पानी ख़राब जाने और क्या -क्या ख़राब करना चाहते है?
यकीनन ये ज्यादा कुछ नहीं बस खुद का ही सर्वनाश करना चाहते है|

 

इसके बाद दिल्ली वालो को मरने के बाद दिल्ली में छोड़ दिए जाने के फैसले पे मोहर लगा दी गयी|

अब ये व्यंग है या सत्य आप खुद ही तय कर ले| किसी ने बहुत सही कहा है:

 

 

भगवान  के भरोसे मत बैठिये, क्या पता भगवान् हमारे भरोसे हों|

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