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बिल्डर ने समय पर घर देकर बायर्स को किया परेशान।

2017-03

SATIRES/FAKE NEWS

नॉएडा: नॉएडा में घर बनने वाले बिल्डर्स देरी से घर की डिलीवरी देने के लिए मशहूर हैं।  इन्ही सब के बीच एक अंजान नए बिल्डर ने पहले से किये गए वादे पर अपने द्वारा बनाए घरों के पोससेशन देकर खरीदारों और दुसरे बिल्डर्स को चौका दिया हैं।  खास मुश्किल में वो लोग हैं जिन्होंने सिर्फ इन्वेस्टमेंट के लिए घर लिया था । अब दुविधा ये हैं की बाकी का पैसा कहा से लाये।

 

जब इस प्रोजेक्ट के एक खरीदार से हमारे संवाददाता ने बात की तो उन्होंने बताया की उन्होंने कई नामी बिल्डर्स के घरों में पैसा लगाया हैं जो 8 -10  साल का न्यूनतम समय लेकर घर देते हैं इसी बीच हम पैसे जुटा लेते हैं और घर बेचकर मुनाफा कम लेते हैं। पर इस बार उनको मुंह की कहानी पड़ी क्युकी अब रजिस्ट्री के लिए पैसे जुटाने पड़ेंगे और बैंक सिर्फ इन देरी से देने वाले प्रोजेक्ट को ही लोन देते हैं क्युकी इसमें मुनाफा ज्यादा हैं।  आमतौर पर इन  देरी से मिलने वाले प्रोजेक्ट्स में बैंक आराम से 4 -5 साल तक सिर्फ ब्याज ही काटता रहता हैं। अब इन्होने समय पर घर देकर हम जैसे कई लोगो को मुश्किल में डाल दिया है। हम इन्वेस्टर्स की बॉडी ने F.I.R लिखवाने का फैसला किया हैं और साथ ही में हाई कोर्ट में PIL डालकर इस प्रोजेक्ट पर स्टे आर्डर लेने की कोशिश भी की जाएगी ।

 

बिल्डर्स लॉबी की एक संस्था के संवाददाता ने हमारे पत्रकार को बताया की ये प्रैक्टिसेज अगर सारे करने लगेंगे तो बैंक्स और बिल्डर्स कम्पनीज को भारी नुक्सान हो सकता हैँ। इसी मुद्दे को ध्यान में रखते हुए हमने अंजान बिल्डर्स के सीईओ को नोटिस भेजकर मीटिंग करने के लिए बुलाया हैं। आशा हैं की वो ऐसे हालात भविष्य ने नहीं पैदा होने देंगे।

 

 

हमारे संवाददाता ने एक आम खरीदार से भी बात की जिन्होंने बताया की जब उन्हें पोस्सेशन का  पत्र आया तो उनकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने 2009 में unitech नामक एक कंपनी के फ्लैट में भी घर खरीदा था जिसका पोस्सेस्सिओं आज भी नहीं मिला हैं वो किराया और बैंक की EMI भर भर के परेशांन  हो चुके थे तब उन्होंने उन्होंने २०१३ के अंत में इस प्रोजेक्ट में घर बुक किया अब आखिरकार हमे घर मिल रहा हैं और हम भी अपने  घर में रह सकते हैं ।

 

जब हमने उनसे पुछा की उन्होंने बिल्डर के खिलाफ FIR क्यों नहीं लिखवाई?

तब उन्होंने हमे बताया की इस देरी की कोई सुनवाई नहीं हैं ४ साल से कोर्ट में केस चलता रहता हैं, पुलिस FIR नहीं लिखती और आम खरीदार बस मरते रहते हैं. हम देरी कर दे पैसे देने में तो 18 प्रतिशत की दर से बिल्डर ब्याज मांगता हैं और उसकी ६ साल की देरी पर नाममात्र का हर्जाना लगता हैं।  केंद्र सरकार और राज्य सरकार एक दुसरे के पास भेजते रहते हैं। यही सच हैं हैं जिसे इस ब्रेकिंग न्यूज़ के तमाशे के बीच कोई नहीं दिखाता। हम वोट बैंक होते तो शायद सुनवाई होती।

 

वो चकित नहीं हुए जब हमने उन्हें बताया की ये न्यूज़ तो बस एक व्यंग हैं।

 

हमारे संवाददाता ने बताया की ये सुनकर उनकी आँखों में  ख़ुशी के आंसू थे।

 

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