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Vela Writes

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दिल्ली में आखिर चुनाव क्यों करवाए जाते है|

2017-12

Opinion

केंद्र शाषित राज्यों में एलेक्शन्स करा के जनता के पैसो का मज़ाक क्यों बनाया जाता है| दिल्ली में जब सरकार को पूर्ण स्वतंत्रा से काम करने नहीं दिया जा सकता तो सरकार क्यों बनवायी जाती है| ये विषय केवल social मीडिया साइट्स पर वाद विवाद का नहीं बल्कि हम सबको सोचने के लिए मजबूर करता है| केजरीवाल और मोदी की लड़ाई थी दिल्ली का इलेक्शन। इसमें मोदी जी जनता को लुभाने में विफल हुए तो जनता ने मौका केजरीवाल को दिया था| पर अगर हर काम पर LG  की मोहर लगवाना अनिवार्य है तो बेहतर होगा की चुनाव LG के लिए ही करवा लिए जाए| 

शिक्षा, बिजली और पानी के क्षत्रो में आप ने उम्मीद से बेहतर काम किया है| मेट्रो के कामो को जल्द ख़तम करने में कमियां है| फालतू के बयानों से इन्होने सबको परेशान भी बहुत किया है| पर ऐसा तो हर सरकार में होता है| किसी भी राज्य की सरकार उठाकर अगर उनके कार्यो का विश्लेषण किया जाए तो कुछ बातें अच्छी और कुछ बुरी सामने आएँगी| मोदी सरकार को ही ले लीजिये| 

 

अगर आप चाहती है की चाँद सुविधाएं लोगो को घर बैठे मिले तो इसमें मुझे तो कुछ गलत नहीं लगता| वैसे भी आज की तारिख में कौन इतना समय रखता है की सरकारी दफ्तरों की कतारों में खड़ा रहे| LG अगर इस फैसले के खिलाफ है तो इसका भी कोई कारण जनता को बताना चाहिए| सिर्फ प्रधानमंत्री के इशारो पे काम करके पूरी दिल्ली की जनता का मज़ाक उड़ाना क्या सही?

सवाल सामने है और जवाब हमे पता नहीं| 

या तो चुनाव करवाना बंद हो या काम करने की छूट मिले| 

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