Menu

Vela Writes

PageViews:

221073

शंख

गूॅंजी थी एक बार शंख जो, कुरुक्षेत्र के रण में।
ध्वनित हो रही आज भी सबके, मन, विचार, आचरण में।
पांडव, कौरव आज भी सबके, मन में डेरा डारे।
केशव बैठा सबके उर में, सबको वही संभारे।

 

Go Back

Comment