Menu
header photo

वेलो की घूमती बातें|

कुछ तो लोग लिखेंगे|

शंख

2016-12

गूॅंजी थी एक बार शंख जो, कुरुक्षेत्र के रण में।
ध्वनित हो रही आज भी सबके, मन, विचार, आचरण में।
पांडव, कौरव आज भी सबके, मन में डेरा डारे।
केशव बैठा सबके उर में, सबको वही संभारे।

 

Go Back

Comment